WELCOME TO YUVRAJ SATTAMATKA

WELCOME to Yuvrajsatta.com

प्रिय मित्रों सट्टा बाजार में 90% लोग कर्ज में होते है दिन पे दिन आदमी डूबता जाता है और उसकी कोसिस यही होती है कि आज नही तो कल वो जीत जायगा पर ऐसा नही हो पाता इसकी वजह हम खुद ही है क्योंकि हम एक जैसा नही चलते है हमारी सोच लखपति बनने की होती है हमारे दिमाग मे बहुत सारे सपने आते है कही ऐ कही वो ओर हम इसके चलते सट्टा लगाते है

आप मेरे हिसाब से चलो तो आप कभी भी लॉस में नही जाओगे गारंटी है

सबसे पहले हमें एक नियम बनाना होगा जिस पे हम टिके रहे फिर कुछ भी क्यो न हो जाय हमे हटना नही चाहिए

नियम नं (एक ) सबसे पहले हमें लिमिट में खेलना होगा पूरे दिन की एक लिमिट होना चाहिए जैसे पूरे दिन में एक हजार का ही वो सट्टा पास हो या फैल

नियम नं (दो) कल्याण में क्या आता है उससे हमे नही मतलब होना चाहिये क्योंकि दोनों सट्टा बाजार अलग अलग है मैन मुम्बई में क्या आता है हमे नही मतबल नही होना चाहिए ठीक है

नियम नं (तीन) हमे अंदाज़ से कभी भी नही खेलना चाहिए हम दिन रात यही सोचते है अभी ये आया तो अब ये आएगा ऐसा कुछ नही होता है सट्टा मटका लाइन के हिसाब से चलता है सपनी सोच के हिसाब से नही

नियम नं (चार) बहुत ही खास बात है हमारे पास पैसा है तो ही सट्टा खेले नही तो कर्ज के अलाबा कुछ नही होगा
हमे चान्स कभी नही लेना चाहिए कि सट्टा खुल जायेगा तो सब बराबर हो जायेगा और ऐसा होता नही है लॉस ओर बढ़ता ही चला जाता है उधारी में खेला गया सट्टा 100 में से 99 लोग कर्ज में दबते चले जाते हैं

नियम नं (पांच) एक आम आदमी एक दिन में कितना कमाता है 300 दे 400 सौ रुपये प्रति दिन
ओर हम यही सोच के सट्टा खेले तो गारंटी से कभी भी घाटा नही होगा पर हम ऐसा नही करते है हम लाखो रुपये चाहिए और यही सोच हम कर्ज में डूबा देती है

WELCOME to Yuvrajsatta.com

Dear Friends, 90% people are in debt in the speculative market, day after day, man sinks and his cosine is that he will win tomorrow or not. But this can not be done because we are ourselves because we do not go the same way Our thinking is to become a Lakhhipati. There are many dreams in our mind. It is said that he and we are betting on it.

If you follow me, then you will never go to Los Angeles.

First of all, we have to make a rule on which we are standing and then why should we not do anything.

Rule no (one) First of all, we have to play in Limit, there should be a limit of the entire day, like a thousand rupees or spread in the whole day

Rule no (two) What should happen in welfare should we not mean that because both speculative markets are different, what comes in Mumbai, we should not be voting right.

Rule no. (Three) We should never play with the idea. We think that day is coming. Now it will come. Now it will come. There is no such thing as speculation that runs according to the Matka line, not according to the dream thought.

Rule no. (Four) Very special thing is that if we have money, then only play speculative, otherwise there will be nothing more than debt
We should never take the chances that the speculation will be opened, then all will be equal, and this does not happen, the loss goes on growing only, the speculation played in the borrowed 99 out of 100 people go into debt

Rule no (five) how much a common man earns in a day 300 to 400 hundred rupees per day
And if we play the speculation of this thinking, there will never be a loss from the guarantee, but we do not do that, we need lakhs of rupees and this thinking is what we do in debt.